Shivam

Shivam

21-09-2022

16:53

राजू श्रीवास्तव अब नही रहें और साथ ही अब नही रहा स्टैंडअप कॉमेडी में किस्सागोई का चलन। स्टैंडअप कॉमेडी 'रील्स' के लिए बनाये गए म्यूजिक की तरह हो गयी है, जिसमें बेस से लेकर "बीट ड्राप" तक सब "हाई नोट्स" में ही हो रहा, दूसरे स्वरों की कोई महत्ता ही नहीं बची वैसे ही एक "बेस" बनायी

जाती है जोक्स लैंड करने के लिए और फिर जल्दी से पंचलाइन थोप दी जाती हैं - परिणामस्वरूप आप म्यूजिक और जोक्स सुनने के दो सप्ताह बाद भूल जाते है। राजू में ये बात नहीं थी वो पूरा समय लेकर आवाज बदलकर औऱ चेहरे के भाव भंगिमाओं के सहयोग से कहानी सुनाते थे।

इस कारण इनके गजोध.., ऐ चाचा हमको देखतिया.., हमेशा जुबान पे याद रहेंगे। वेस्ट में इतना समय लेकर कहानियां बुनने वाला मुझे सिर्फ़ डेव चैपल दिखाई पड़ता है और अपने यहाँ के बचे -खुचे में अभिषेक उपमन्यु किस्सागोई के साथ कोई समझौता नहीं करता। वरुण ग्रोवर भी है और ज़ाकिर खान तो है ही।

अगर किसी कलाकार के जाने से किसी कला के एक रूप पर अल्प विराम लग जाये तो वाकई वो बड़ा कलाकार था। बाकी उनके राजनीतिक दृष्टि की बात किसी दिन और कर लेंगे आज नहीं। आज सिर्फ श्रद्धाजंलि।


Follow us on Twitter

to be informed of the latest developments and updates!


You can easily use to @tivitikothread bot for create more readable thread!
Donate 💲

You can keep this app free of charge by supporting 😊

for server charges...